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Dream Incomplete !

Image Courtesy: wallpaperswa.com

Poetry by RJ Sanju

Title: Dream Incomplete
Language
:
Hindi

“सपना” ये कोई गली में चलने वाली भोली सी लड़की का नाम नहीं है,, ना ही किताबों में साहित्यकारों की लेखनी से कागजों पर गुदने वाली नायिका बल्कि ये मेरा अपना सपना है , वो सपना जिसका मुझे ना जाने कब से इंतज़ार था ,, ना जाने कब से जिसको में याद कर रहा था ,, ना जाने जिसके लिए में कई रातो तक सोया नहीं था।
                           इस सपने में मेरा चैन था , इसमें मेरा ख्याल था , मेरा दर्द था , मेरे अरमान थे और इसी में ‘ वो ‘ थी , हाँ मेरी ‘वो’ जिसकी कल्पना में हर वक़्त करता हूँ और जिसके लिए कुछ वक़्त से परेशान था।  वेसे अक्सर में परेशान नहीं होता हु। . बस जीता हु कुछ खूबसूरत सी यादों के साथ , जो में किसी खास जगह बिता कर लौटा था …।
Dream Incomplete
Image Courtesy: wallpaperswa.com

‘चंडीगढ़ ‘ क्या दिन था वो ,, क्या शाम थी वो।  अद्भुत ,, उस वक़्त को याद कर के लगता है कि बस इसी शान्ति और प्रेम के साथ पूरी जिंदगी गुज़ार दी जाए। ‘Rock garden’ का वो झरना , मुझे मेरे हसीं पलों की सुन्दर सी याद दिला देता , जब भी में लेपटोप के कोने से उन पलो को याद करता ,,,, और वो गुलाब के बगीचे की खुशबु ,, मेरा मन उसी ख़ुशी से भर देती जिससे मेरा दिल अक्सर झूम उठता है.….  जैसे तब झूम उठा था। जब हमारा रिक्शावाला गलती से हमें ‘Rock garden’ की बजाए ,,, गुलाब के बगीचे के पास ले आया था और ‘हम’ खूब हँसे थे….. उसकी बेवकूफी पर ,,,

                     खैर ये वाकया भी याद रखने लायक है,, क्युकी “उसकी” बातूनी हरकते और मोबाइल वाली खुसुर- फुसुर मुझे दीवाना सा कर देती है और मैं अपने आप को उन यादों मे अक्सर डूबा सा पाता हू।
                       वेसे डूब तो में उस रात भी गया था……  उसके “पागल प्रेम” में , जब वो बेहाल हो चुकी थी मेरी बाहों में , अपने को पाकर।  प्रेम की सारी हदों को दरकिनार कर के , उसने तो ‘श्रंगार’ का सागर ही उड़ेल दिया था।  गदगद हो उठा था , मेरा मन ,, तन,, । और निद्रा गायब थी ,, कमोवेश की भावना तीव्र थी।  लेकिन ‘प्रेम’ … सिर्फ प्रेम की आड़ में , मैं उसके हर कर्म का लोहा मान चुका था। दीवानापन मेरी आँखों में साफ़ देखा जा सकता था ,, मेरी चाहत में वो एक शीतलता का पैमाना बन गई थी। जिससे मैं ‘तृप्त’ होना चाहता था ,, ‘प्यास’ बुझाने का विचार बिल्कुल भी नहीं था।  रात अपने चरम पर थी और हमारे शरीर निढाल हो चुके थे। ” श्रंगार ” , ” रति ” में बदल चुका था और आँखे सारी कहानी बिना जुबान के बयाँ  कर रही थीं।
                     ना तो कोई थकने को तैयार था और ना ही हारने को ,, लेकिन “प्राक्रतिक संपदा ” का खनन हो चुका था और “Human Right” भी पीड़ित था  .….
 कि  तभी उस ‘लीला’ के अंतिम समय में अचानक कानों पर की घनघनाहट ने नैनों को ज़ोरदार ठोकर मारी,,, और कारे नैनों ने सूरज की तिलमिलाती ,, रोशनी का सामना किया।  आखें मानो चोंधियां गई , “रति ” अब तक “वियोग ” में  बदल चुका था,,,, और सेज सुनसान पड़ी थी।  माहौल भी गंभीर हो चुका था ,, पिता जी कुल्ला करने में व्यस्त थे ,, माता जी टिफिन के ढक्कन के साथ आजमाईश में व्यस्त थी … और ,,, हम ,,, अंगड़ाई  लेकर “अधूरे सपने ” के अवशेषों को झाड़ने में व्यस्त थे।Let me know in comments how you find my poetry” Dream Incomplete “Following is My Official Show Poster:
rj sanju

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Written by Sanjay Tiwari

Rj Sanju a.k.a. Sanjay Tiwari is the Radio Jockey at FireMud FM.
He writes situational stories and poetry. He covers up Real Life Love stories at his Show and at his official Blog at FireMud FM

His Show-->> Gustakhiyan
Timing-->> Every Tuesday and Thursday 11-12 pm IST
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